सोमवार को आरक्षण विधेयक पर करूंगी हस्ताक्षर : राज्यपाल

सोमवार को आरक्षण विधेयक पर करूंगी हस्ताक्षर : राज्यपाल

रायपुर। विधानसभा में आरक्षण विधेयक सर्व सम्मति से पारित होने के अब आरक्षण संसोधन विधेयक पर राज्यपाल अनुसुईया उइके सोमवार को इस पर हस्ताक्षर करेंगी। एक सामाजिक कार्यकम मे  शामिल होने  के दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्यपाल ने बिल पर अब तक हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर जानकारी दी।

उइके ने कहा कि कल पास हुआ है विधेयक।तत्काल हस्ताक्षर नहीं होता। पहले विधेयक का परीक्षण किया जाता है, उसके बाद सचिवालय से लीगल एडवाजसर भेजते हैं।उनके विधिक सलाहकार अवकाश पर है। शनिवार व रविवार को अवकाश है।आरक्षण की पहल मैंने की थी  सब कुछ सकारात्मक रहा।वह संसोधन विधेयक पर सोमवार को हस्ताक्षर करेंगी। राज्यपाल ने कहा जैसे नोटिफिकेशन जारी होगा, इसी महीने से सारी रुकी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएंगी। राज्य सरकार ने कुल 76 फीसदी आरक्षण का संसोधन विधेयक लाया है। शुक्रवार की रात प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र चौबे, मो.अकबर विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करने के बाद इसे राज्यपाल के पास खुद लेकर गए थे। अब तक राज्यपाल ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उनकी साइन के बाद ही ये कानून लागू होगा।

ये भर्तियां अटकी हुई हैं-छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम रोक दिया है। वहीं राज्य वन सेवा के साक्षात्कार टाल दिये गये हैं। स्कूल में 12 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी खटाई में है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा के 171 पदों पर इस साल परीक्षा ली थी। मुख्य परीक्षा में सफल 509 लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। यह साक्षात्कार 20 से 30 सितम्बर के बीच चला। वहीं 8 से 21 अक्टूबर  तक प्रस्तावित राज्य वन सेवा परीक्षा के साक्षात्कार को टाल दिया गया है। इस परीक्षा से 211 पदों पर भर्ती होनी थी।

उच्च न्यायालय ने 19 सितम्बर को फैसला सुनाया था-बिलासपुर उच्च न्यायालय ने गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बनाम राज्य सरकार के मुकदमे में 19 सितम्बर को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले में अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार के उस कानून को रद्द कर दिया जिससे आरक्षण की सीमा 58त्न हो गई थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने 29 सितम्बर को सभी विभागों को अदालत के फैसले की कॉपी भेजते हुए उसके मुताबिक कार्रवाई की बात कही। उसी के बाद आरक्षण को लेकर भ्रम का जाल फैलना शुरू हो गया। हालांकि अब नए कानून के आने की उम्मीद से हालात बदलने के आसार हैं।

MRINMOY MALLICK

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