नक्सल गतिविधियों में आई कमी कहीं टारगेट किलिंग नहीं :भूपेश नक्सल इलाकों में अब सडक़ें नहीं कटती, नेताओं की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्कता, यूनिफाइड कमांड की बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री

नक्सल गतिविधियों में आई कमी कहीं टारगेट किलिंग नहीं :भूपेश नक्सल इलाकों में अब सडक़ें नहीं कटती, नेताओं की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्कता, यूनिफाइड कमांड की बैठक में  शामिल हुए मुख्यमंत्री

रायपुर। माओवाद से निपटने व आगे की रणनीति तय करने आज राजधानी में यूनिफाइड कमांड की महत्वपूर्ण बैठक हुई।करीब 2 घंटे तक चली इस बैठक में नक्सल ऑपरेशन और शांतिपूर्ण चुनाव सहित कई विषयों पर रणनीतिक चर्चा हुई।इस हाईलेवल बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजीपी अशोक जुनेजा सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, आईबी के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि बैठक में अधोसंरचना से जुड़े विषयों और सरकार की योजनाओं पर चर्चा हुई।नक्सल गतिविधियों में कमी आई है। 75 नए कैम्प खुले है। अबूझमाड़ के अंदर तक सरकार की पहुंच हुई है। ढाई लाख किलोमीटर तक की सडक़े बस्तर के इलाके में बनी है। 34 बड़े पुल-पुलिया बने हैं। नक्सलवाद पर अंकुश लगा है।उन्होंने कहा, चुनाव के मद्देनजर इलाके में फोर्स को अलर्ट किया गया। उसकी व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
बस्तर के अंदर हर जनप्रतिनिधियों को पूरी सुरक्षा
भाजपा के आरोप पर मुख्यमंत्री बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कहीं कोई टारगेट किलिंग नहीं हो रही है।भाजपा को विश्वास नहीं तो केंद्रीय एजेंसी से जांच करा लें. बस्तर के अंदर हर जनप्रतिनिधि को पूरी सुरक्षा है. नेताओं को रैली या दौरा करने के दौरान पुलिस को साथ रखने का भी निर्देश है। बैठक को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- पुलिस को आम बस्तर के लोग दुश्मन मानते थे जिसमें परिवर्तन आया, अब पुलिस और आम जनता के बीच मित्रता की स्थिति है। वन विभाग के अधिकारियों के साथ उनकी दुश्मनी रहती थी, क्योंकि वो केस बनाते थे, अब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के लोग कई तरह के प्रोजेक्ट चला रहे है।लघु वनोपज खरीदी का काम कर रहे हैं, उसमें वैल्यूएशन कर रहे हैं तो इन विभागों के साथ लोगों की मित्रता है। दोस्ती का भाव है। पहले जो दुश्मनी थी, अब वह दोस्ती में बदल गई है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रयासों का सुखद परिणाम यह है कि 650 गांव नक्सल मुक्त कराए गए हैं। नक्सलियों की भर्ती में भी कमी आई है। आज की बैठक में इसे और आगे बढ़ाए जाने पर बात हुई है। आने वाले समय में प्रदेश में चुनाव हैं, चुनाव में भी सारे दल के लोग राजनेता के लोग आएंगे उनकी सुरक्षा, रोड ओपनिंग पार्टी की मुस्तैदी, कोई चूक न हो इस बात को विशेष रूप से ध्यान देने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री ने बैठक में नक्सल इलाकों के अधिकारियों से चर्चा के बाद कहा- वहां जॉइंट ऑपरेशन होते हैं। केंद्र और राज्य की फोर्स के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। लगातार इस तरह की बैठकें हो रही है। फोर्स के कैंप में डॉक्टर होते हैं तो वह ग्रामीण जनों का इलाज करते हैं। हमारे जवान पढ़े-लिखे हैं तो थोड़ा समय निकालकर बच्चों को पढ़ाते भी हैं, तो इससे जवानों में भी कुछ अच्छी भावना आती है और लोगों में भी भाव आता है कि जो सुरक्षा बल के जवान हैं वह हमारे लिए हैं। हमारी सुरक्षा के लिए हैं, नहीं तो पहले सडक़ें काट दी जाती थीं, आज कोई सडक़ कटी हुई नहीं मिलती।

MRINMOY MALLICK

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