खालिस्तान के समर्थन में निकली रैली का मुद्दा विधानसभा में गूंजा
रायपुर। राजधानी रायपुर में खालिस्तान के समर्थन में निकले जुलूस पर भाजपा विधायकों ने आज विधानसभा में जमकर विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इस जुलूस में जो लोग भी शामिल रहे वह बख्शे नहां जाएंगे। मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य को प्रस्ताव की शक्ल मिली जो कि सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों तरफ के समर्थन से पारित भी हुआ।
शून्यकाल में सर्वप्रथम पूरे प्रदेश की बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था पर भाजपा ने कामरोको प्रस्ताव लाकर इस पर चर्चा कराने मांग की।पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने विस्तार से अपनी बात कही। खालिस्तान के समर्थन में राजधानी रायपुर में निकले जुलूस को लेकर सबसे पहले जनता कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने विरोध दर्ज कराया। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मुख्यमंत्री इस समय सदन में उपस्थित हैं। छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेश में जुलूस के रूप में यह विघटनकारी घटना घट गई। मुख्यमंत्री को यहां कहना चाहिए कि वे विघटनकारी ताकतों के साथ नहीं हैं। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि तेलीबांधा तालाब के पास लोग इक्कठे होते हैं और खलिस्तान के पक्ष में नारे लगाते हुए रैली निकल जाती है। खुफिया तंत्र को यह मालूम कैसे नहीं हुआ? क्या पुलिस सोई हुई है? बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि खलिस्तान पर जो यह जुलूस निकला उस पर यहां मुख्यमंत्री का वक्तव्य आना ही चाहिए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री भी अपना वक्तव्य दें।
संसदीय कार्य मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री सतत् मानिटरिंग कर रहे हैं। बैठकें कर रहे हैं। यहां गलत ताकतों को सिर उठाने नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस विधायक कुलदीप जुनेजा ने कहा कि मुख्यमंत्री दोषी लोगों को नहीं बख्शेंगे। कड़ी कार्रवाई होगी। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि दिन दहाड़े रायपुर में खलिस्तानी समर्थकों का जुलूस निकल जाता है। सवाल यह है कि इस पर क्या किसी की गिरफ्तारी हुई? छत्तीसगढ़ अपराधियों का पनाह स्थल बना हुआ है। अब तक तो यही सुने थे कि पंजाब में थाने में बंद खलिस्तानी समर्थक को उनके साथी छुड़ाकर ले गए और अब रायपुर में ये जुलूस निकल गया। हमने बढ़ती अपराधिक घटनाओं पर स्थगन दिया है। सारे कामकाज रोककर इस पर चर्चा कराई जाए। विधानसभा उपाध्यक्ष संत राम नेताम ने कहा कि बिगड़ती कानून व्यवस्था पर स्थगन प्रस्ताव मिला। सदस्यों व्दारा व्यक्त किए गए विचारों को सुनने के बाद मैंने स्थगन को अग्राह्य कर दिया है। स्थगन अग्राह्य होने पर भाजपा विधायकों ने विरोध दर्ज कराते हुए नारेबाजी शुरु कर दी। भारी शोर शराबा होते देख उपाध्यक्ष को सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरु होने पर बृजमोहन अग्रवाल ने खलिस्तान के समर्थन में निकले जुलूस वाले मामले को फिर से उठाया। संसदीय कार्य मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि मुख्यमंत्री इस पर वक्तव्य देंगे।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कल 35-40 लोग बिना कोई सूचना दिए गुरुव्दारे के पास से नारे लगाते निकले। सिक्ख समाज ने देश भक्ति की जो मिसाल पेश की है और जो बलिदान दिया है उसे भुलाया नहीं जा सकता। कोई खलिस्तान के समर्थन में नारे लगाए इसे देश बर्दाश्त नहीं करेगा। मैंने टीवी फूटेज निकलवाने के निर्देश दिए हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। अजय चंद्राकर ने कहा कि मुख्यमंत्री के वक्तव्य को क्यों न प्रस्ताव का रूप दे दिया जाए और इसे सर्वसम्मति से पास करा लिया जाए। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देश में ऐसी दो घटना हुई है। पहले पंजाब एवं उसके बाद अब रायपुर। रायपुर की घटना से पूरे देश में छत्तीसगढ़ की बदनामी हुई है। देश भर के अखबारों में इस पर खबर छपी है। मुख्यमंत्री के आए हुए वक्तव्य को प्रस्ताव मानते हुए सर्वसम्मति से पास किया जाए। विपक्ष के इस सूझाव पर मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान कर दी। संसदीय कार्य मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि मुख्यमंत्री के वक्तव्य को प्रस्ताव के रूप में ले लिया जाए इस पर हम सब सहमत हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री के वक्तव्य को प्रस्ताव के रूप में सम्मिलित कराने की अनुमति देता हूं।
इंदु बंजारे ने जब जताई नाराजगी
बसपा विधायक इंदु बंजारे सदन में जमकर नाराज हुईं। उन्होंने प्रश्नों पर लंबी चर्चा को लेकर आपत्ति की। औद्योगिक निवेश को लेकर भाजपा विधायकों के सभी प्रश्नों पर चर्चा के बाद अध्यक्ष महंत ने अगले प्रश्न के लिए इन्दु का नाम पुकारा। उस वक्त प्रश्नकाल खत्म होने में 8-9 मिनट शेष थे। इंदु बंजारे के खड़े होते ही भाजपा से शिवरतन शर्मा,अजय चंद्राकर आदि अपने पूरक प्रश्नों को लेकर खड़े हो गए। इस पर श्रीमती बंजारे ने कहा कि अध्यक्ष जी,हम पहली बार के विधायक हैं। हम लोग दूर-दूर के इलाकों से चुनकर आते हैं। जनता की बातों को रखना चाहते हैं। इनकी लंबी लंबी चर्चा और इनके राजनीति स्वार्थ के कारण प्रश्न काल में हमको अवसर नहीं मिलता। इनके जैसे हमारा अनुभव नहीं है, हम लोग एक-दो ही प्रश्न करते हैं और इनकी वजह से वह अवसर भी नहीं मिलता।

