छोटी सजा के लिए पदोन्नति मान्य न करना अनुचित-हाईकोर्ट
मामले का निराकरण करने डीजीपी को निर्देश

बिलासपुर। एक छोटी सजा के लिए इंस्पेक्टर को पदोन्नति पर ज्वाइनिंग से रोकना अनुचित है। मानते हुए हाईकोर्ट ने डीजीपी को मामले का निराकरण करने का निर्देश दिया है।

ग्राम-केदुआ, थाना सरायपाली, जिला महासमुंद निवासी मुकेश पटेल वर्ष 2019 में पुलिस थाना नगरी, जिला महासमुंद में पुलिस सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ थे। उक्त पदस्थापना के दौरान मुकेश पटेल के विरूद्ध कुछ शिकायतें प्राप्त होने पर पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर द्वारा विभागीय जांच के पश्चात् 3 मई 2021 को एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से वेतनवृद्धि रोकने के लघुदण्ड से दंडित किया गया था। 23 अगस्त 2021 को मुकेश पटेल को इन्सपेक्टर के पद पर प्रमोशन प्रदान किया गया परन्तु उन्हें विभागीय सजा मिलने के कारण इंस्पेक्टर पद पर ज्वाइनिंग नहीं दी गई। इस पर सब इंस्पेक्टर मुकेश पटेल द्वारा अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई।

अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) रायपुर द्वारा दिनांक 03 मई 2021 को याचिकाकर्ता को लघुदण्ड से दण्डित किया गया था जिसका प्रभाव 1 जुलाई 2021 से दिनांक 30 जून 2022 तक था। लघुदण्ड का प्रभाव समाप्त हो जाने पर याचिकाकर्ता पुलिस इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन दिया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य विरूद्ध एस.पी. पारासर एवं अन्य, तथा उच्च न्यायालय, बिलासपुर शासन के वाद में पारित न्याय दृष्टांत का हवाला दिया गया। उच्च न्यायालय द्वारा इस आधार पर की दिनांक 1 जुलाई 2022 को छोटी सजा का प्रभाव समाप्त हो जाता है। याचिकाकर्ता को प्रमोशन का लाभ प्रदान करने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), पुलिस मुख्यालय, रायपुर को आदेशित किया गया कि वे याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करें।

MRINMOY MALLICK

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