कश्मीर में तेजी के साथ बदल रही राजनीतिक निष्ठा
घाटी में नेता ही नहीं, कार्यकर्ता भी बदल रहे हैं वफादारी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बहुत तेजी से राजनीतिक निष्ठाओं में बदलाव हो रहा है। न केवल मुख्यधारा के नेता और कार्यकर्ता वफादारी बदल रहे हैं, बल्कि कट्टर अलगाववादी होने का दावा करने वाले भी अब अलग भाषा बोलते दिखाई देते हैं। जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के नेताओं का एक से दूसरे दलों में जाना कोई नई बात नहीं है।
अतीत में एक पार्टी के वरिष्ठ नेता दूसरे में शामिल होने के लिए अपनी पार्टी को छोड़ दिया, लेकिन आज की तरह इतने बड़े पैमाने पर ऐसा कभी नहीं हुआ। जम्मू-कश्मीर के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक गुलाम नबी आजाद ने 52 साल बाद कांग्रेस छोड़ अपनी डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (डीएपी) बनाई। कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता ताज मोहिउद्दीन, तारा चंद, जी.एम. सरूरी, अब्दुल मजीद वानी और अन्य ने आजाद के साथ खड़े होने के लिए कांग्रेस छोड़ दी। वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) छोड़ दी, पीडीपी के पूर्व मंत्री, अल्ताफ बुखारी, सजाद लोन, बशारत बुखारी ने भी पीडीपी छोड़ दी। अल्ताफ बुखारी ने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी ‘जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी’ बनाई, सज्जाद लोन ने अपने पिता की राजनीतिक पार्टी को जारी रखा, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) और बशारत बुखारी सज्जाद की पार्टी में शामिल हो गए। पीडीपी के अन्य वरिष्ठ नेता निजामुद्दीन भट व पीरजादा मंसूर और अब्बास वानी पीडीपी छोडक़र सज्जाद लोन की पार्टी में शामिल हो गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब्दुल गनी वकील भी सज्जाद लोन के पीसी में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि सज्जाद के भाई बिलाल लोन अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस में पीसी का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। बिलाल ने हाल ही में अपने पैतृक शहर हंदवाड़ा का दौरा किया और समर्थकों की एक सभा से कहा कि वह जल्द ही लोगों के समर्थन से एक बड़ा कदम उठाएंगे। जाहिर है बिलाल अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस से नाता तोडक़र मुख्यधारा की राजनीति में शामिल होने के अपने इरादे का खुलासा कर रहे थे। अब उनका औपचारिक रूप से हुर्रियत से अलग होना केवल समय की बात है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के प्रमुख नेताओं में से एक देवेंद्र सिंह राणा ने पार्टी छोड़ दी और जम्मू नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर धर्मवीर सिंह सहित एक दर्जन वरिष्ठ नेताओं के साथ भाजपा में शामिल हो गए।
राणा वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्य मंत्री (पीएमओ) डॉ. जतिंद्र सिंह के छोटे भाई हैं। नेकां के वरिष्ठ नेता सुरजीत सिंह सलाथिया भी देवेंद्र सिंह राणा के साथ भाजपा में शामिल हो गए। राणा नेकां के प्रांतीय अध्यक्ष थे और माना जा रहा है कि उनके जाने से आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नेकां के पूर्व विधायक शेख इशफाक जब्बार और उनकी पत्नी नुजहत इशफाक, जो जिला विकास समिति गांदरबल की अध्यक्ष हैं, भी व्यावहारिक रूप से नेकां छोड़ चुके हैं और अब उनके भाजपा में शामिल होने की घोषणा का इंतजार है। नेकां के एक अन्य वरिष्ठ नेता सैयद अखून, जो शेख इशफाक जब्बर के ससुर हैं, को उनकी बेटी नुजहत और दामाद इश्फाक की नेकां विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर कर दिया गया है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि पाकिस्तान समर्थक तहरीक-ए-हुर्रियत (दिवंगत कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी द्वारा गठित) और जमात-ए-इस्लामी के कई वरिष्ठ सदस्य सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बचने के लिए चुपके से किसी मुख्यधारा के राजनीतिक दल में शामिल हो गए।

