महापौर का चुनाव दिलचस्प हो गया,बागियों और भितरघातियों की संख्या बढ़ गया
भाजपा ने दर्जन भर बागियों को पार्टी से निकाला तो कांग्रेस ने सिर्फ एक को कारण बताओ नोटिस थमाया
बिलासपुर। एक समय था जब बिलासपुर में कांग्रेस की तूती बोलती थी लेकिन पिछले दो दशक से कांग्रेस के जनाधार में गिरावट आई है। पिछले विधानसभा चुनाव में शेयर की तरह कांग्रेस उठी लेकिन इस बार के चुनाव में कांग्रेस न केवल धड़ाम से गिरी बल्कि सरकार की बागडोर भी हाथ से छूट गई।
नतीजन भाजपा मन,धन,कर्म और वचन से कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ दिया है । साल भर पहले प्रदेश में सरकार बनाने के तुरंत बाद से भाजपा नगरीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव में पार्टी का परचम लहराने ठोस और जमीनी स्तर पर तैयारी में जुट गई थी। भाजपा और सरकार ने कांग्रेस को विभिन्न मुद्दों पर उलझा कर चुनावो से ध्यान बंटवाने कि पूरी कोशिश की जिसमें वह सफल भी रही ।कांग्रेस का बिखरा हुआ प्रचार तंत्र इसका उदाहरण है लेकिन अंतिम फैसला तो मतदाता करते है ।भाजपा नेताओं को चुनाव में क्लीन स्वीप करने का विश्वास हो चला है तो कांग्रेस नेताओं को साल भर के भाजपा सरकार असफलताओं पर भरोसा है । बिलासपुर में महापौर का चुनाव कांग्रेस को भरोसा और भाजपा को विश्वास पर टीका है। स्थानीय चुनाव में पार्टी कैसे भी हो प्रत्याशी का चेहरा भी मतदाता देखते है । कांग्रेस भाजपा दोनों को अपने प्रत्याशी के चेहरे पर भरोसा है।
प्रदेश की न्यायधानी में कल से दिग्गजों का जमावड़ा शुरू हो जाएगा । पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्र में ट्रेक्टर यात्रा निकालकर कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार करेंगे तो भाजपा नेता उप मुख्यमंत्री अरुण साव पार्टी का घोषणा पत्र जारी करेंगे। शहर की जनता यह बात अच्छी तरह समझ गई है कि मेयर चुनाव कांग्रेस ,भाजपा के प्रत्याशी नहीं बल्कि दोनों पार्टी के बड़े नेता लड़ रहे है इसलिए शहर की सरकार चुनने को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो चुका है। हफ्ते भर बाद 11 फरवरी को मतदान होना है जिसकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। 9 फरवरी को शाम तक चुनावी शोर थम जाएगा। समय कम है और प्रचार प्रसार बहुत ज्यादा करना है। नगर पालिक निगम बिलासपुर में शहर सरकार को लेकर सभी पार्टियां अपनी ताकत झोंक रही है। कांग्रेस और भाजपा ने पूर्व अध्यक्षों पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद नायक के लिए महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और रायपुर की पूर्व महापौर किरणमई नायक सहित कांग्रेस विधायक लगे हुए है तो वही दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी एल पद्मजा (पूजा विधानी) के लिए शहर विधायक अमर अग्रवाल और उनके पति अशोक विधानी निगम के पूर्व सभापति भी है। न्यायधानी का चुनाव हर समय हाई प्रोफाइल ही रहा है। विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा का चुनाव हो या फिर शहर की सरकार चुनने का मसला हो, सभी की निगाहे बिलासपुर पर टिकी रहती है। बीस साल विधायक और पूर्व मंत्री रहे विधायक अमर अग्रवाल अब राजनीति में मंजे हुए खिलाड़ी है कांग्रेसी नेताओं को वे अपनी तरफ करना अच्छी तरह जानते है ।वे पूर्व के सभी चुनाव के संचालक भी रहे और भाजपा के प्रत्याशियो को जीत का परचम लहराकर महापौर और सांसद भी बनाए है। शहर के 38 वार्डो में प्रत्याशियों के चयन में अमर अग्रवाल की ही चली है। इस बार भी निगम चुनाव में अमर अग्रवाल की प्रतिष्ठा दांव पर है ।
इधर कांग्रेस के परंपरागत वोटों के अलावा प्रत्याशी प्रमोद नायक के अपने व्यक्तिगत और सामाजिक वोट भी है, जिनका सहयोग उन्हें मिल रहा है। जिन 17 ग्राम पंचायतों,नगर पालिका और नगर पंचायतों को बिलासपुर नगर निगम में शामिल किया गया है वहां वोटरों की संख्या बहुतायत है इसलिए कांग्रेस की पैनी नजर इन ग्रामीण वोटरों पर है ।
60 और 40 का है अनुमान
जब आम आदमी से शहर के बड़े हुए ग्राम पंचायतों को जोडक़र बने निगम के क्षेत्र में मौजूदा चुनाव को लेकर चर्चा की गई तो उन्होंने 60- 40 का अनुमान बताया है। लेकिन 60 प्रतिशत और 40 प्रतिशत में प्रत्याशियों के नाम को लेकर कोई स्पष्ट बात नहीं की है। मुकाबला भी कांटे की टक्कर का होना बताया गया है। वर्तमान में जितने भी बढ़े हुए ग्राम है जिनको निगम में शामिल किया गया है, वो सभी कांग्रेसी गढ़ वाले ग्राम है और कुछ में कांग्रेस के पार्षद भी रहे है।
घोषणा पत्र बनाम बैठकों का दौर
भारतीय जनता पार्टी ने अपना अटल विश्वास पत्र के नाम से घोषणा पत्र को जारी कर दिया है। कांग्रेस का घोषणा पत्र अभी जारी नहीं हुआ है कि जनता उसकी तुलना कर सके। कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं के द्वारा बैठको का सिलसिला चल पड़ा है। वार्डो में भी फ्लैस और प्रचार गाडिय़ों का शोर शुरू हो चला है। वार्डो में चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। पार्टी के पदाधिकारी महापौर के पक्ष में वार्डो में दौरा कर रहे है। सभी पार्षद प्रत्याशी भी अपने प्रचार के साथ महापौर का प्रचार भी कर रहे है।
घुसपैठियों पर रहेगी पैनी नजर
चुनाव में भीतरघात का खतरा भाजपा और कांग्रेस दोनों में ही बना रहता है। स्थानीय मुद्दों के साथ हो लोकल प्रत्याशी के चेहरे को लेकर यह चुनाव होता है। टिकिट वितरण में भी लोगो की नाराजगी देखने को मिली है। कुछ नाराज लोगों को मनाया भी गया है। दोनो पार्टी में वर्तमान में कांटे की टक्कर कही जा रही है। घुसपैठियों पर भी पैनी नजर पार्टियों के लोग बनाए हुए है, ताकि उनको खुश किया जा सके।
पूर्व सरपंच भी सवा लाख के
पिछले साल ही अस्तित्व में आए नगर निगम में शामिल सभी ग्राम पंचायत में अधिकांश भाजपा और कांग्रेस समर्पित सरपंच रहे थे। पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों ने सरपंचों को साथ में लेकर अपना चुनाव प्रचार किए है जीत काह्न परचम भी लहराए थे, जबकि वहीं भाजपा के प्रत्याशियों ने उन्हें पूछा भी नहीं और वे सभी चुनाव हार गए थे। यहां वही कहावत चरितार्थ होती है कि मरा हुआ हाथी भी सवा लाख के बराबर होता है। यानी सभी पूर्व सरपंच भी सवा लाख के है। अभी उनकी पूछ परख होगी तो प्रत्याशी की जीत भी सुनिश्चित हो सकती है। क्योंकि गांवों में अभी भी सरपंची का जोर है ।

