हिन्दी भाषा की स्वीकारता बढ़ रही-भुवन राज सिंह, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय एवं भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वाधान में जगदगुरू शंकराचार्य व्याख्यान माला एवं छात्र अध्ययन यात्रा का हुआ उद्घाटन

हिन्दी भाषा की स्वीकारता बढ़ रही-भुवन राज सिंह, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय एवं भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वाधान में जगदगुरू शंकराचार्य व्याख्यान माला एवं छात्र अध्ययन यात्रा का हुआ उद्घाटन

बिलासपुर। पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर में दिनांक 21/03/2024 को केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय एवं भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वाधान में जगदगुरू श्री शंकराचार्य व्याख्यान माला एवं छात्र अध्ययन यात्रा का उद्घाटन किया गया है। इस कार्यक्रम का स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलसचिव भुवन राज सिंह ने दिया। उन्होंने सम्माननीय अतिथियों का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए डॉ. हीरालाल शर्मा ने कहा कि भारतीय परम्परा में अतिथि देवों भव: को चरितार्थ करते हुए हिन्दीत्तर प्रान्त (केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र) से आये आगंतुक छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परम्परा से रूबरू हो सकेंगे। बीज वक्तव्य देते हुए केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय से पधारी डॉ. किरण झा ने कहा कि हिन्दी समुन्द्र रूपी सागर है जो सम्पूर्ण भारत को समेटे हुए है। उन्होंने केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के योजनाओं की भी जानकारी दी। मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि हिन्दी लोकाश्रय के बल से आगे बह रही है तथा आरोपित भाषा से संस्कार नहीं मिल पाती है। सारी भाषाओं में प्रेम है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें  कुलपति प्रो. डॉ. बंश गोपाल सिंह ने कहा कि हिंदीत्तर प्रांत की छात्र-छात्राएं छत्तीसगढ़ में हिन्दी को बढ़ाने जिन साहित्यकारों का योगदान है, उनसे रूबरू हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि 1990 से लेकर आज तक हिन्दी भाषा का विकास अत्यंत तेज गति से हुआ है। जिससे की हिन्दी की स्वीकारता धीरे-धीरे बड़ी है। उन्होंने भारतीय परिदृश्य में भाषा की राजनीतिकरण पर भी प्रकाश डाला तथा सभी भाषा को महत्व देने की आवश्यकता पर बल दिया। तदउपरान्त जगदगुरू श्री शंकराचार्य व्याख्यान माला का भी आयोजन किया गया।

जिसके मुख्य अतिथि स्वामी श्री चक्र महामेरू पीठाधिपति ने जगदगुरू श्री शंकराचार्य के द्वारा किये गये कार्यो पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने के कहा कि संस्कृति बचेगी तब देश बचेगा। धर्म से संस्कृति जुड़ी हुई है और धर्म, संस्कृति के साथ भारत की संस्कृति को अक्षुण बनाए रखना अति आवश्यक है। जो कि जगदगुरू शंकराचार्य का मुख्य उद्देश्य है। तदउपरान्त मंचस्थ अतिथितियों का शाल, श्रीफल प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया गया। आभार प्रदर्शन हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जयपाल सिंह प्रजापति ने दिया। कार्यक्रम आगन्तुक हिन्दीत्तर प्रदेश (केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र) से पधारे छात्र-छात्राओं के साथ भारी संख्या में लोगों की उपस्थिति थी।

MRINMOY MALLICK

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