बिलासपुर स्ट्रांग रूम की सुरक्षा थ्री लेयर में, अफसर-कर्मचारियों के आने-जाने की रजिस्टर में एंट्री,
बीएसएफ की निगरानी में स्ट्रॉन्ग रूम में रखी गई हैं सीलबंद ईवीएम
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के मतदान के बाद नतीजों का इंतजार है। बिलासपुर में 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना के लिए सील बंद ईवीएम पेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में रखा गया है। यहां निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
स्ट्रॉन्ग रूम में आने-जाने वाले कर्मचारी से लेकर अधिकारियों की भी निगरानी बीएसएफ के जवान कर रहे हैं, रजिस्टर में बाकायदा एंट्री की जा रही है। उम्मीदवारों ने भी स्ट्रॉन्ग रूम में अपने कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई है।
परिसर में एंट्री करने से पहले ही वहां मौजूद जवानों द्वारा रोक दिया जाता है। गेट में एंट्री बंद है। यहां किसी को आने की इजाजत नहीं है।

थ्री लेयर में स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा है। मतगणना स्थल पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लगाई गई है। इनर लेयर (भीतरी) में जहां ईवीएम सील बंद है और मध्य लेयर, मतगणना बिल्डिंग में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स बीएसएफ की एक कंपनी लगी है, जिसके इंचार्ज असिस्टेंट कमांडेंट प्रद्युत मल्लिक हैं। सभी 6 स्ट्रॉन्ग रूम को डबल लॉक कर सील किया गया है। उसे सीसीटीवी और सुरक्षा मोर्चा से कवर किया गया है।
बाहरी लेयर में छत्तीसगढ़ आर्ल्ड फोर्स बीएसएफ के जवान तैनात हैं। साथ ही पूरे आउटर क्षेत्र की पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी थाना प्रभारी कोनी पौरुष पुरें और स्टाफ को दिया गया है। पुलिस की तरफ से डीएसपी लाइन मंजुलता केरकेट्टा प्रभारी और आरआई भूपेंद्र गुप्ता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।
कर्मचारी से लेकर अफसरों तक को एंट्री नहीं
स्ट्रॉन्ग रूम में देर रात टेंट का काम करने वाले कर्मचारी अंदर जुटे हुए है। वहीं, बाहर गेट पर सशस्त्र जवान पहरेदारी कर रहे है। एक रजिस्टर रखा है, जिसमें स्ट्रॉन्ग रूम में घुसने वाले कर्मचारियों का नाम दर्ज किया जा रहा है। अधिकारियों को भी अंदर जाने पर रजिस्टर में एंट्री करना जरूरी है। उन्हें ये भी बताना पड़ रहा है, कि वो किस काम से अंदर जा रहे हैं। स्ट्रॉन्ग रूम में अधिकारी-कर्मचारियों को मोबाइल लेकर जाने की मनाही है।
उम्मीदवारों ने भी लगाई है कार्यकर्ताओं की ड्यूटी
चुनाव आयोग की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बाद भी उम्मीदवारों को भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई है। जिला निर्वाचन अधिकारी अवनीश शरण ने उनके लिए अलग से कमरे का इंतजाम किया है, जहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिसके जरिए कार्यकर्ता स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी कर रहे हैं।
कांग्रेस के साथ ही भाजपा, बसपा सहित दूसरे राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता स्ट्रॉन्ग रूम की लगातार निगरानी कर रहे हैं और रतजगा कर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
ईवीएम से वोटों के बाद वीवीपैट पर्ची की भी गिनती
चुनाव आयोग की नई व्यवस्था और निर्देश के अनुसार ईवीएम से वोटों की गिनती करने के बाद जिले के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में 5-5 वीवीपैट मशीनों का चयन किया जाएगा। वीवीपैट मशीनों में जमा पर्ची की भी गिनती की जाएगी। इसका मकसद मतगणना में पारदर्शिता और ईवीएम में डाले गए वोटों का मिलान करना होगा।
इसके बाद ही मतगणना सुपरवाइजर की ओर से उम्मीदवारों को मिले वोटों का आंकड़ा जिला निर्वाचन अधिकारी और विधानसभावार नियुक्त प्रेक्षकों को जाएगा। ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती और वीवीपैट में जमा पर्ची की गिनती के बाद संबंधित ईवीएम के वोटों का मिलान किया जाएगा। दोनों में समानता होने की स्थिति में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ईवीएम के बाद विधानसभावार रैंडमली उम्मीदवारों के मतगणना एजेंटों की मौजूदगी में किसी भी ईवीएम से 5 वीवीपैट मशीनों का चयन किया जाएगा। एक-एक वीवीपैट की पर्ची की गिनती की जाएगी। ये सब मतगणना एजेंटों के सामने ही होगा।
पोस्टल बैलेट और ईटीबीपीएस की गिनती पहले होगी
पोस्टल बैलेट और ईटीबीपीएस की गिनती पहले की जाएगी। डाक मत पत्रों की गणना 17 टेबलों में की जाएगी। कर्मचारियों को मतगणना के हर फेज की जानकारी चुनाव आयोग की ओर से तय अलग-अलग फॉर्म में देनी होगी। विधानसभावार 14 टेबलों में मतगणना होगी। हर टेबल पर चार कर्मचारी मतगणना सुपरवाइजर, गणना सहायक, माइक्रो ऑब्जर्वर समेत एक भृत्य की ड्यूटी लगाई गई है।

