श्रम और श्रमिक के बिना अर्थव्यवस्था अधूरी – कुलपति

श्रम और श्रमिक के बिना अर्थव्यवस्था अधूरी – कुलपति

बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्व विद्यालय बिलासपुर में आज डिपार्टमेंट ऑफ कामर्स एंड फाइनेंशियल स्टडीज और एन एस एस के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर विश्व विद्यालय के चतुर्थ तल पर स्थित, सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन दोपहर तीन बजे किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और वक्ता हरिश केडिया अध्यक्ष छत्तीसगढ़ लघु उद्योग थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति आचार्य अरूण दिवाकर नाथ बाजपेयी ने किया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ पूजा पांडेय, डॉ शुमोना भट्टाचार्य और गौरव साहू थे। सर्वप्रथम अतिथियों ने मां सरस्वती को दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डॉ एच एस होता अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा रखीं और बोरे बासी को छत्तीसगढ़ के श्रमिकों के संस्कृति की प्रतीक बताया। मुख्य अतिथि हरीश केडिया ने अपने उद्बोधन में अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए श्रमिकों की स्थिति और चुनौती पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बसंत साहू, रागिनी बंजारे विजय गभेल ऐसे अनेक उदाहरण देकर कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की तरक्की उसके स्वयं के हाथ में है। उन्होंने कहा कि युवा श्रम करो शर्म नहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति आचार्य अरूण दिवाकर नाथ बाजपेयी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का दिन श्रमिकों का सम्मान का दिन है। उन्होंने असंगठित क्षेत्र में मजदूरों की स्थिति पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि संगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सरकार अनेक सुविधाएं और व्यवस्था बनाई है परन्तु असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए अभी भी कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा आदि काल से वर्तमान सभ्यता तक अर्थव्यवस्था के केन्द्र में श्रम और श्रमिक विद्यमान है श्रम और श्रमिकों के बिना अर्थव्यवस्था अधुरा है । आभार प्रदर्शन डॉ पूजा पांडेय विभागाध्यक्ष कामर्स एंड फाइनेंशियल स्टडीज ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर मनीद्र मेहता ने किया। इस अवसर पर उपकुलसचिव नेहा यादव, नेहा राठिया, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ मनोज सिन्हा, डॉ गौरव साहू, डॉ शुमोना भट्टाचार्य, डॉ रश्मि गुप्ता, डॉ हैरी जार्ज, डॉ हामिद अब्दुल्ला, डॉ सौमित्र तिवारी, डॉ लतिका भाटिया, डॉ रेवा कुलश्रेष्ठ, डॉ सीमा बेरोलकर, डॉ सुषमा तिवारी, यशवंत पटेल, धर्मेंद्र कश्यप सहित बड़ी संख्या में विश्व विद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक कर्मचारी और विद्यार्थी गण उपस्थित थे।

MRINMOY MALLICK

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