पश्चिम बंगाल हिंसा को लेकर केंद्र सख्त
गृह मंत्रालय ने तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट की तलब
नई दिल्ली। रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर सूबे की ममता बनर्जी सरकार और केंद्र के बीच तल्खी बढ़ गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सूबे में हुई हिंसा और कानून व्यवस्था को लेकर चार अप्रैल को राज्य सरकार से तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को खत लिखकर कहा है कि वे रामनवमी के दिन हुई हिंसा और सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर पूरी रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर केंद्र को भेजें। इससे पहले पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने गृहमंत्री अमित शाह को खत लिखकर कहा था कि राज्य में हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इसी चिठ्ठी के बाद गृह मंत्रालय हरकत में आया और मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है। इससे पहले शाह ने इस संबंध में राज्यपाल आनंद बोस और भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजुमदार से बात कर सूबे के कानून व्यवस्था का आकलन किया था।

मजुमदार ने शाह को लिखे खत में बताया था कि हावड़ा के अलावा हुगली जिले में भी भाजपा की शोभा यात्रा के दौरान बवाल किया गया। रेलवे स्टेशन पर पथराव हुआ। जिसके चलते रेल सेवाएं भी बाधित हुईं। उनका आरोप था कि यह सब सत्ताधारी टीएमएसी और उनके समर्थकों के बिना नहीं हो सकता था। उन्होंने अपने खत में आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन की ओर से भाजपा नेताओं व सांसदों को दंगा प्रभावित इलाकों में जाने से रोका गया। जबकि टीएमसी के नेता और मंत्री लगातार क्षेत्र में घूम रहे हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी मांगी रिपोर्ट
कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिशड़ा में 2 अप्रैल की शाम रामनवमी के जुलूस से शुरू हुई हिंसा पर 3 अप्रैल की रात तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ ने राज्य सरकार को इस संबंध में एक पूरक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया, जिसमें रिशड़ा में हिंसा के कारणों को बताया गया हो। बुधवार को मामले की सुनवाई होगी।


