इंदौर में रामनवमी पर बड़ा हादसा
मंदिर की बावड़ी की छत धंसी, 13 की मौत

इंदौर में रामनवमी पर बड़ा हादसामंदिर की बावड़ी की छत धंसी, 13 की मौत

इंदौर। इंदौर के बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में रामनवमी पर बावड़ी की छत धंसने से 13 लोगों की मौत हो गई। 40 फीट गहरी बावड़ी में 30 से ज्यादा लोग गिरे थे। बावड़ी से कुल 11 शव निकाले गए, जबकि पुलिस ने रस्सियों की मदद से 19 लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां दो लोगों ने दम तोड़ दिया। बावड़ी में चार से पांच फीट पानी है। नगर निगम तीन पंप की मदद से पानी निकाला। हादसा सपना संगीता रोड स्थित स्नेह नगर में हवन के दौरान हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लोग बावड़ी की छत पर बैठे थे। वजन से उसकी छत टूट गई और लोग नीचे गिर गए।
60 साल पुराना है मंदिर 
यह मंदिर करीब 60 साल पुराना है। मंदिर में दर्शन करने आया एक बच्चा अब भी लापता है। कलेक्टर ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच कराने की बात कही है। बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में निर्माण और खुदाई का काम चल रहा है। आशंका है कि यह भी हादसे की वजह हो सकता है। कुछ रहवासियों ने चूहों के कारण कुआं खोखला होने की बात भी कही है।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में पुरानी निजी बावड़ी के धंस जाने से व्यक्तियों की असामयिक मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि है यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। अनेक प्रयासों के बाद कई नागरिकों को बचाया नहीं जा सका। घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं। सरकार पीडि़त परिवारों के साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि इंदौर में हुए हादसे से बेहद आहत हूं। राज्य सरकार बचाव और राहत कार्य में तेजी से आगे बढ़ रही है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया बावड़ी से निकाली गई 11 डेडबॉडी में से 10 महिलाओं की है। अभी तक हादसे में हम 13 लोगों को खो चुके है। मौके पर प्रशासन रेस्क्यू कार्य में जुटा हुआ है। हादसे की जांच के आदेश भी दिए जा चुके हैं। जिन लोगों का बचाव किया गया है, उनका इलाज किया जा रहा है।
कार्यक्रम वहां नहीं करने का भी कहा था
हादसे में बचे शख्स ललित कुमार शिंद ने बताया कि हम वहां 15 साल से रह रहे हैं। मंदिर प्राचीन है। हम नीचे गिरे तो पानी ही पानी था। बहुत पानी था, गंदा था। सांस ही नहीं ली जा रही थी। महिलाएं-बच्चे ज्यादा थे। एक दिन पहले किसी ने मना भी किया था कि वहां कार्यक्रम मत करो, पर होनी को कौन टाल सकता है। बेगुनाह मारे गए। मैं रोज मंदिर जाता हूं। आज भी गया था। मैं एक तरफ खड़ा था, इसलिए शायद बच गया। प्रशासन ने जैसे ही रस्सी डाली तो सबसे पहले मैं ही बाहर आया।  उन्होंने बताया कि मंदिर में पूजा चल रही थी। हम सब लोग वहीं खड़े थे। यज्ञ चल रहा था तो किसी ने कहा कि आहुति डालो। जब हम आहुति डाल रहे थे, वैसे ही भरभराकर जमीन धंस गई। हम  नीचे चले गए। एक अनुमान के मुताबिक 50 से 60 लोग मौके पर थे। पहले तो कुछ समझ ही नहीं आया। नीचे पानी-कीचड़ था, हम तो घबरा ही गए थे। कैसे बाहर आए भगवान ही जाने। हादसे को लेकर प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि जहां पर बावड़ी का निर्माण हुआ था, उसके पास ही कमरा भाजपा के एक पार्षद का कार्यालय है। करीब डेढ़ साल पहले आस-पास के रहवासियों ने नगर निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल को लिखित शिकायत दी थी। जिसमें कहा गया था कि ये बावड़ी अवैध तरीके से बनाई जा रही है। इससे कभी भी हादसा हो सकता है, इसके बाद भी ना तो कमिश्नर ने और ना ही किसी प्रशासनिक अधिकारी ने इस ओर ध्यान दिया। लोगों की शिकायत को नजर अंदाज कर दिया गया। इसी लापरवाही के कारण आज ये हादसा हो गया है। 

MRINMOY MALLICK

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