नागरी सेवी सम्मान से सम्मानित हुए डॉ. घृतलहरे

नागरी सेवी सम्मान से सम्मानित हुए डॉ. घृतलहरे

बिलासपुर। आचार्य विनोबा भावे की सद्प्रेरणा से 1975 में स्थापित देव नागरी लिपि को समर्पित विश्व की एकमात्र संस्था नागरी लिपि परिषद गांधी स्मारक निधि, राजघाट, नई दिल्ली की कार्यसमिति की बैठक संस्था कार्यालय नई दिल्ली में 25 मार्च  को परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रेमचंद पातंजलि की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व राज्य संयोजक डॉ. हेमन्त पाल घृतलहरे सहायक प्राध्यापक हिन्दी विभाग, शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय बिलासपुर ने किया। वे नागरी लिपि और हिन्दी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

इसी परिप्रेक्ष्य में दिनांक 26 मार्च 2023 को मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट नारनौल (हरियाणा)  द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि सम्मेलन नारनौल (हरियाणा) में ट्रस्ट एवं नागरी लिपि परिषद् द्वारा  डॉ. हेमन्त पाल घृतलहरे को विशिष्ट नागरी सेवी सम्मान से सम्मनित किया गया। डॉ. हेमन्त पाल घृतलहरे वर्तमान में शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय बिलासपुर में सहायक प्राध्यापक हिन्दी के पद पर कार्यरत हैं। वे नागरी लिपि और हिन्दी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में लगातार बढिय़ा काम कर रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों में विषय विषेशज्ञ के रूप में व्याखान हेतु आमंत्रित किए जाते हैं। डॉ. घृतलहरे छात्र छात्राओं के व्यक्तित्व विकास और करियर मार्गदर्शन के क्षेत्र में लगभग 23 वर्षों से लगातार कार्य कर रहे हैं और उनके पढ़ाए हुए विद्यार्थी आज बड़ी संख्या में शासकीय सेवाओं में हैं। वे एक गंभीर शिक्षाविद् और कुशल प्रशासक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने छ. ग. ज्ञान ज्योति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पामगढ़ व संत शिरोमणि गुरु घासीदास महाविद्यालय पामगढ़ की स्थापना और विकास में  महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे संत शिरोमणि गुरु घासीदास महाविद्यालय के संस्थापक प्राचार्य भी रहे। उन्होंने अनुसूचित क्षेत्र के शासकीय महाविद्यालय हसौद तथा दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र के शासकीय महाविद्यालय सनावल में प्राचार्य के दायित्व का निर्वहन भी किया जहां सुव्यवस्थित अध्यापन, महाविद्यालय विकास, पत्रिका प्रकाशन, निर्विरोध छात्र संघ चुनाव, राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी आयोजन, नैक मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए। अपनी निष्पक्ष व सकारात्मक कार्यशैली तथा प्रभावशाली अध्यापन शैली की वजह से वे पालकों के बीच सुपरिचित तथा विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने पांच शोध ग्रंथों का सम्पादन किया है, एक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के सह संपादक रहे। उनका एक कविता संग्रह मेरी कलम को न आवाज दो भी प्रकाशित हो चुकी है। इस काव्य संग्रह का लोकार्पण भी नागरी लिपि के मंच पर किया गया। वे गुरु घासीदास सतनाम फाउंडेशन राष्ट्रीय चेरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष  हैं और कला साहित्य संस्कृति के विकास में योगदान दे रहे हैं। यूट्यूब के माध्यम से भी उन्होंने शिक्षा और कला के प्रचार प्रसार का प्रयास किया है।
नारनौल में अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि सम्मेलन  च्साझा संसार वैश्विक साहित्य-मंच, विलनिस (नीदरलैंड्स) के संस्थापक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामा तक्षक की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय हिंदी निदेशालय और तकनीकी शब्दावली आयोग। भारत सरकार, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो अवनीश कुमार मुख्य अतिथि थे। वहीं सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव और नागरी लिपि परिषद्, नई दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष तथा अहमदनगर (महाराष्ट्र) के प्रमुख शिक्षाविद् डॉ शहाबुद्दीन शेख विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, और डॉ हेमन्त पाल घृतलहरे का सम्मान किया।  अपने व्याख्यान में इन्होंने नागरी लिपि को राष्ट्र लिपि और विश्व लिपि बनाने की दिशा में काम करने पर जोर दिया। इसमें  काठमांडू (नेपाल) की डॉ श्वेता दीप्ति, सिंगापुर सिटी (सिंगापुर) की डॉ संध्या सिंह, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) की डॉ भावना कुंअर, ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) के रोहितकुमार हैप्पी मौका (मॉरीशस) के डॉ कृष्णकुमार झा, पोर्ट ऑफ स्पेन (ट्रिनिडाड) के डॉ शिवकुमार निगम, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की डॉ एस अनुकृति और टोरंटो (कनाडा) की डॉ शैलजा सक्सेना ने भी (वर्चुअल मोड पर) नागरी लिपि के स्वरूप और स्थिति पर विस्तृत चर्चा करते हुए इसके महत्त्व और प्रासंगिकता को रेखांकित किया। इस अवसर पर संजय पाठक (अलवर), डॉ कृष्णा आर्य, डॉ महीपाल सिंह, भूपसिंह भारती, स्वतंत्र विपुल (नारनौल) आदि कवियों ने काव्य-पाठ किया। कार्यक्रम में डॉ घृतलहरे के साथ साथ प्रो अवनीश कुमार और डॉ रामा तक्षक को विश्व हिंदी-सेवी सम्मान तथा डॉ शहाबुद्दीन शेख (अहमदनगर), डॉ नूरजहां रहमतुल्लाह (गुवहाटी), उपमा आर्य (लखनऊ) और श्वेता मिश्रा (पुणे) को च्विशिष्ट नागरी-सेवी सम्मानज् से विभूषित भी किया गया।   इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन में ट्रस्टी डॉ कांता भारती, दीनबंधु आर्य (लखनऊ), हवलदार जयप्रकाश तक्षक (जाट बहरोड़), महेंद्रसिंह गौड़, डॉ सुमेरसिंह यादव, किशनलाल शर्मा, गजानंद कौशिक, दुलीचंद शर्मा, बलदेवसिंह चहल, परमानंद दीवान, रामसिंह मधुर, मुकेश कुमार, डॉ मीना यादव, प्रो अंजू निमहोरिया, डॉ शर्मिला यादव, हरमहेंद्रसिंह यादव, दलजीत गौतम, शफी मोहम्मद, कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट, डॉ महताब सिंह, बीरसिंह यादव, मुकेश कुमार आदि गणमान्य नागरिकों की उपस्थित विशेष उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संचालन समकालीन साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर और चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव ने किया तथा आभार प्रर्दशन कृष्णा आर्य ने किया।

MRINMOY MALLICK

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