जीव-जन्तु व वनस्पतियों का संरक्षण कराना होगा-सीसीएफ
जीडीसी कॉलेज में जीवविज्ञान व वनस्पति विज्ञान विभाग की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला
बिलासपुर। शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के जीवविज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभाग तथा आईक्यूएसी के संयुक्ततत्वाधान में 16-17 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला विषय जैव-विविधता संरक्षण: समस्याएं एवं चुनौतियॉ का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्धाटन सत्र आज के मुख्य अतिथि एस. जगदीशन (आई.एफ.एस.) निर्देशक, अचानकमार टाइगर रिजर्व एवं सीसीएफ वाईल्ड लाइफ बिलासपुर ने कहा कि जैव विविधता से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। हमें सभी प्रकार के जीव-जन्तु एवं वनस्पतियों का संरक्षण कराना होगा। प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का मितव्ययिता पूर्वक उपयोग करके हमें आने वाली पीढिय़ों के लिए भी प्राकृतिक संसाधन को संरक्षित रखना होगा। हमारे असंतुलित विकास मॉडल के कारण हजारों वनस्पतियॉं और जीव जन्तु विलुप्त हो रहें हैं जिससे पर्यावरण में भंयकर असंतुलन की स्थिति निर्मित हो रही है। यह मानव जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा होगा। वनस्पतियों एवं वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन से बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसर भी सृजित किये जा सकते हैं। मानव सभ्यता के विकास की धुरी जैव-विविधता मुख्यत: आवास विनाश, आवास विखण्डन, पर्यावरण प्रदूषण, विदेशी मूल के वनस्पतियों के आक्रमण, अतिशोषण, वन्य-जीवों का शिकार, वनविनाश, अति-चराई, बीमारी आदि के कारण खतरे में है। अत: पारिस्थितिक संतुलन, मनुष्य की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति एवं प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा, भू-स्खलन आदि) से मुक्ति के लिये जैव-विविधता का संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस.आर.कमलेश, प्राचार्य, शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय बिलासपुर ने कहा कि लोगों को जैव विविधता के प्रति जागरूक कराने के लिए तथा इसका हमारे जीवन में कितना महत्व रखता है ये बताने के लिए प्रत्येक वर्ष 22 मई को विश्व जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर, 2000 को 22 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ के रूप में घोषित किया था। इसके पीछे यूएनओ का मुख्य उद्देश्य यह था की विश्व में सभी लोगो को जैव विविधता के प्रति सतर्क किया जाये जिससे विश्व की जैव विविधता बनी रहे और उसका संरक्षण किया जा सके। साल 2001 से यह हर साल 22 मई को मनाया जाता है। मानव जीवन में जैव विविधता का बड़ा महत्व है। इस संसार में सभी जीवन को स्थिर बनाये रखने में जैव विविधता एक अहम योगदान निभाती है। यह पारिस्थितिकीय प्रणाली के संतुलन को बना के रखती है। विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी तथा वनस्पति एक दूसरे की जरूरतें पूरी करते है और साथ ही ये एक दूसरे पर निर्भर भी है। हमारी जैव विविधता की समृद्धि ही पृथ्वी को रहने के लिए तथा जीवन यापन के लायक बनाती है। दुर्भाग्य से बढ़ता हुआ प्रदूषण हमारे वातावरण पर गलत प्रभाव डाल रहा है। बहुत से पेड़-पौधे तथा जानवर प्रदूषण के दुष्परिणाम के चलते अपना अस्तित्व खो चुके है और कई लुप्त होने की राह पर खड़े है। अगर ऐसा ही रहा तो सभी प्रजातियों के सर्वनाश का दिन दूर नहीं है। इसीलिए मनुष्य को इसके महत्व के बारे में अवगत कराना होगा ताकि वे इसे गंभीरता से समझे और इसे संतुलन बनाये रखने के लिए हर संभव प्रयास करे। जैव-विविधता भोजन, कपड़ा, लकड़ी, ईंधन तथा चारा की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। जैव-विविधता कृषि पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ रोगरोधी तथा कीटरोधी फसलों की किस्मों के विकास में सहायक होती हैं। वानस्पतिक जैव-विविधता औषधीय आवश्यकताओं की पूर्ति भी करती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. ज्योतिरानी सिंह, प्राचार्य, शाास.ई. राघवेन्द्रराव विज्ञान महाविद्यालय बिलासपुर, ने कहा कि विश्व को यदि बचाना है तो जैव विविधता का संरक्षण सर्वोपरि होना चाहिए। पर्यावरण से ही समस्त जीवों और मानव जाति का जीवन संचालित हो रहा है और हम इसी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहें हैं इसे रोकना होगा। विश्व के बारह चिन्हित मेगा बायोडाइवर्सिटी केन्द्रों में से भारत एक है। जैव विविधता, किसी दिये गये पारिस्थितिकी तंत्र, बायोम, या एक पूरे ग्रह में जीवन के रूपों की विभिन्नता का परिमाण है। हर एक वनस्पति तथा जीव का वातावरण को रहने के योग्य बनाने में अलग-अलग उद्देश्य है। इसलिए अगर हमें अपने वातावरण की शुद्धता को ऊँचे स्तर तक पहुँचाना है तो हमें जैव विविधता के संतुलन को बनाये रखने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा। लोगों को जैव विविधता के प्रति जागरूक कराने के लिए तथा इसका हमारे जीवन में कितना महत्व रखता है ये बताने के लिए विश्व जैव विविधता दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता हैं। विशिष्ट अतिथि पं.संजय दुबे, अध्यक्ष, सी.एम.डी. पीजी महाविद्यालय बिलासपुर, ने कहा कि कमरे के भीतर बैठकर जैव विविधता के समस्याओं को हल नहीं किया जा सकता इसके लिए हमें प्रकृति के बीच जाना होगा। अपने जल, जंगल एंव जमीन को बचाना होगा। रासायनिक पदार्थों का उपयोग कम से कम करना होगा। पशु-पक्षी एवं नदियों को बचाना होगा। प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग कम करना होगा। गंगा और अरपा जैसी नदियों के प्रदूषित होने से जैव विविधता को बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है, इसे समझना होगा। पृथ्वी पर जैविक संसाधनों के हा्रस को जैव विविधता हा्रस के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी का जैविक धन जैव-विविधता लगभग 400 करोड़ वर्षों के विकास का परिणाम है। इस जैविक धन के निरंतर हा्रस ने मनुष्य के अस्तित्व के लिये गम्भीर खतरा पैदा कर दिया है। दुनिया के विकासशील देशों में जैव-विविधता हा्रस चिन्ता का विषय है। विशिष्ट अतिथि उमेशचन्द्र मेहर, क्षेत्रीय प्रबंधक, बैंक ऑफ बडौदा, बिलासपुर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिकों , विद्वानों , सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ कार्पोरेट जगत को भी मिलकर काम करना होगा। पर्यावरण संरक्षण हमारा सामूहिक दायित्व है। पौधों, जन्तुओं एवं सूक्ष्मजीवों सहित विभिन्न प्रकार के जीवधारी, जो इस ग्रह पर हमारे सहभागी हैं, संसार को रहने योग्य एक सुन्दर स्थान का रूप प्रदान करते हैं। जीवधारियों में पायी जाने वाली असाधारण विविधता हमारे ग्रह के अभिन्न एवं महत्त्वपूर्ण भागों की रचना करती है, हालाँकि निरन्तर बढ़ रही जनसंख्या के कारण जैव विविधता को गम्भीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता उपेन्द्र दुबे, वरिष्ठ प्रोजेक्ट ऑफिसर डब्ल्यू.डब्ल्यू. एफ इंडिया सीआईएल ने कहा कि यदि हम एक वन्य जीव का संरक्षण करते हैें तो प्रकृति में यह शक्ति है कि अपने संख्या बढ़ाने में वे सफल हो जाते हैं, जरूरत है कि वन्य प्राणियों का संरक्षण किया जाय। देश में घटती हुई वन्य जीव की संरक्षण किया जा सकता है।
मालविका कोलवीन, प्रोजेक्ट ऑफिसर, डब्ल्यू.डब्ल्यू. एफ इंडिया सीआईएल ने कहा कि नई-नई प्रौद्यौगिकी का उपयोग कर जैसे सीसीटीवी कैमरा, जीपीएस की मदद एवं उसकी आवश्यकता चारागाहा की व्यवस्था , पारिििस्थ्त तंत्र की ध्यान रख वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि की जा सकती है। डॉ. ए.के.गिरोलकर, सेवानिवृत्त प्राचार्य, प्रोफेसर वनस्पतिविज्ञान ने कहा कि हमारा मानव क्रिया कलाप प्रकृति और वन्य जीवों के साथ सही नहीं है। प्रकृति उनका आवास है जिसे हम उजाड़ रहे हैं इसलिए वे हमारे घर उजाड़ रहे हैं। इसके अलावा हमने बिना सोचे समझे अनेक वनस्पतियां और जंतु दूसरे देशों से एलियन की तरह हमारे देश और प्रदेश में लाए हैं, जिनसे हमारे पर्यावरण में अनेक खतरे उत्पन्न हुए हैं। डॉ. ए.के दीक्षित, प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान, गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने कहा कि पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता संरक्षण विषय पर सारगर्भित और उपयोगी व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अनेक प्रकार की भाजियां उपलब्ध हैं जिनमें विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में है इन प्रजातियों का उपयोग, संरक्षण और संवर्धन करना होगा। प्रकृति का कण कण कीमती है लेकिन हम उसकी कीमत समझ नहीं पा रहे हैं। कार्यशला के विषय विशेषज्ञ और छत्तीसगढ़ वन्य प्राणी बोर्ड के वन्य प्राणी विशेषज्ञ मंसूर खान ने वन्य जीवों खासकर हाथियों के व्यवहार पर विस्तार से प्रकाश डाला और वन्य जीवों के साथ मानव व्यवहार कैसा होना चाहिए इस पर व्यावहारिक और उपयोगी जानकारी दी। वन्य जीवों के साथ सही व्यवहार करेंगे तो वे नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। डॉ वीणा पाणी दुबे, सेवानिवृत्त प्रोफेसर वनस्पति ने कहा कि जैव विविधता और वन्य जीव संरक्षण के संबंध में बताया। जैव विविधता सिद्धांत के विद्वानों के विचार और वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम का जिक्र करते हुए उन्होंने विषय के आधारभूत ढांचे को प्रस्तुत किया।

