पंचलेट में ग्रामीण विषमता और एक अकेली औरत में पुरुषवादी सोच पर प्रहार
इप्टा का छत्तीसगढ़ राज्य सम्मेलन संपन्न
वैचारिक एवं रंगकर्म से संबंधित गोष्ठियां भी हुई

पंचलेट में ग्रामीण विषमता और एक अकेली औरत में पुरुषवादी सोच पर प्रहारइप्टा का छत्तीसगढ़ राज्य सम्मेलन संपन्नवैचारिक एवं रंगकर्म से संबंधित गोष्ठियां भी हुई

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ इप्टा का दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन व नाट्य समारोह संपन्न हुआ। समापन दिवस पर दो नाटक पंचलेट और एक अकेली औरत का मंचन हुआ। अंचल के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं रूप सज्जाकार उमाकांत खरे का सम्मान किया गया।

इन दोनों प्रस्तुतियों में सामाजिक विषमता पुरुषवादी सोच को कलाकारों ने बखूबी उजागर किया। दो सत्रों में अलग-अलग विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार भी रखें । वैचारिक रंग कर्म से संबंधित गोष्ठियों में ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई । राज्य कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। 

अंतिम दिवस पहले सत्र में नफरत और पूर्वाग्रह के दौर में विवेकशील कैसे बने इस विषय पर मुख्य वक्ता ईश्वर सिंह दोस्त ने अपनी बात रखी दूसरे सत्र में जेंडर संवेदनशीलता और युवाओं के सवाल पर वक्ता उषा आठवे व शैलेंद्र कुमार ने गहन चर्चा की। पंचलैट में सामाजिक विषमता पर प्रहार किया गया ग्रामीण परिवेश में घुस रही शहरी संस्कृति का बेहतरीन चित्रण किया गया और किस तरह सरपंच अपने फायदे के लिए भोले-भाले ग्रामीणों का इस्तेमाल करते हैं यह भी प्रदर्शित किया गया। 

टिप टॉप लाइक इस प्रस्तुति मैं ग्रामीण परिवेश की आपसी तनातनी को मनोरंजन से उठाया गया फणीश्वर नाथ रेणु की इस कहानी में ग्रामीणों के कई मुद्दे उजागर हुए । इस नाटक में गोधन की भूमिका पीयूष गलरकर नेनिभाई सरपंच की भूमिका मणिमय मुखर्जी  ने अदा की।  महतो की भूमिका राजेश श्रीवास्तव ने निभाई। पोस्टमैन का रोल विक्रम ने किया गौरी की भूमिका कुसुम पटेल ने निभाई सरपंच के रोल में अविनाश ने प्रभावित किया ब्राह्मण का रोल प्रियांशु शुक्ला और मैकेनिक की भूमिका अंकित सिंह ने निभाई संगीत भारत भूषण परगनिया व निर्देशन चित्रांश श्रीवास्तव ने किया। 

इप्टा लखनऊ की प्रस्तुति एक अकेली औरत फ्रेंक रेमऔर दारियो फो की कृति पर आधारित इस प्रस्तुति का अनुवाद रूपांतरण निर्देशन एवं एकल अभिनय वेदा राकेश ने किया समाज में पुरुषवादी सोच पर प्रहार करती इस प्रस्तुति में एक महिला के संघर्ष आंतरिक तनाव और देवर द्वारा प्रताडि़त करने के अनुभवों को चित्रित किया गया। आप कौन चीज के डायरेक्टर है इस नाटक में महाभारत काल के भीम को आज के आम आदमी का प्रतिनिधि बनाया गया जो दुर्बल है । दुर्योधन अराजकता लूटमार और भ्रष्टाचार का प्रतीक है । 

जो बलवान है महाभारत में तो भीम दुर्योधन को हरा देता है लेकिन आज के भारत में दुर्योधन को भीम पर हावी दिखाया गया है नौटंकी शैली के नाटक ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया मूल लेखक सैकत चट्टोपाध्याय की कृति को छत्तीसगढ़ी में रूपांतरण नंदकिशोर ने किया नाटक में कालीचरण की भूमिका रोहित रेड्डी दुर्योधन का रोल श्रीकांत पाठक भीम विक्रम मुखिया की भूमिका पीयूष ने निभाई निर्देशक चारु श्रीवास्तव थे।

हबीब तनवीर की कला से प्रेरणा लें- शैलेश पांडेय

इप्टा सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक शैलेश पांडेय ने कहा हबीब तनवीर जैसे कलाकार सिर्फ एक ही होते हैं । 

दूसरा हबीब तनवीर कभी पैदा नहीं होगा। वह ऐसी विभूति है जिनसे हम सब प्रेरणा लेना चाहिए उन्होंने कहा इप्टा बिलासपुर कलैंडर बनाकर काम करें और ज्यादा से ज्यादा नाटक करें श्री पांडेय ने रंग मंदिर रायपुर में हबीब तनवीर से हुई मुलाकात के संस्मरण सुनाए।

वरिष्ठ रंगकर्मी उमाकांत सम्मानित

वरिष्ठ रंगकर्मी उमाकांत खरे को इप्टा बिलासपुर और  विधायक शैलेष पांडेय ने सम्मानित किया । उल्लेखनीय है कि श्री खरे पिछले 5 वर्षों से कला एवं रूप सज्जा के क्षेत्र में सक्रिय हैं एवं इप्टा के आरंभिक दौर से जुड़े हुए हैं। 

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि जब इप्टा शुरू हुई तो कहीं से भी कोई फाइनेंस नहीं था हम लोग सब अपने पास से थोड़ा  धन इक_ा करके नाटक किया करते थे।

MRINMOY MALLICK

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