किसानों ने एसईसीएल मुख्यालय घेरा
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौपकर की न्याय की गुहार
बिलासपुर। भू-विस्थापित किसान ग्रामीण हजारों की संख्या में पदयात्रा कर बिलासपुर पहुंच। कोरबा जिले मे एसईसीएल की कोयला खदानों के लिए खेत मकानों से बेदखल हुए प्रभावित लोग 60 सालों से मुआवजा रोजगार और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। एसईसीएल मुख्यालय में प्रदर्शन के बाद सभी उच्च न्यायालय रवाना हुए.
सोमवार सुबह करीब 1 किलोमीटर लंबी रैली का बिलासपुर प्रवेश हुआ कोल इंडिया और एसईसीएल प्रबंधन से नाराज भू विस्थापित किसान न्याय की आशा लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन देने पहुंचे। इससे पहले सीपत मुख्य मार्ग से सभी एसईसीएल मुख्यालय पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिला पुरुष किसान ग्रामीणों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि मुख्यालय के सामने सडक़ पर बैठ जाने से आवागमन ठप हो गया।
भू विस्थापित किसान न्याय यात्रा का नेतृत्व कर रहे सपुरन कुलदीप ने बताया 60 साल से कोरबा जिले में कॉल उत्खनन के नाम पर दोहन किया जा रहा है लोग भुखमरी, बेरोजगारी के खिलाफ लड़ रहे हैं कोल खदानों के कारण करीब 65 गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं ।
मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त एसईसीएल खनिज संपदा के लिए लोगों के जीवन की परवाह नहीं कर रही है। वर्षों पुरानी उनकी मांगों में प्रभावित हर परिवार में एक व्यक्ति को रोजगार, शिक्षा रहने के लिए सर्वसुविधा युक्त मकान खेती के लिए जमीन शामिल है।
आयोजकों ने कहा गेवरा से बिलासपुर पदयात्रा का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट से न्याय की मांग करना है। इसके लिए 10 बिंदुओं का मांग पत्र स्वीकार करने का मुख्य न्यायाधीश से प्रतिनिधि मंडल ने आग्रह किया है.
वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत किसान केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के बीच उलझे है. जिससे भू विस्थापित और खदानों से प्रभावित परिवार कोल इन्डिया और एसईसीएल की मनमानी से त्रस्त है।

