बीमार पत्नी की देखरेख के लिए कर्मचारी को स्थानांतरण में राहत

बिलासपुर। जिला न्यायालय में स्टेनोग्राफर के स्थानांतरण के एक मामले में हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल व जिला न्यायाधीश को नियमानुसार निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
जिला न्यायालय में पदस्थ स्टेनोग्राफर संदीप श्रीवास का स्थानांतरण जिला बिलासपुर से जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही कर दिया गया था। संदीप श्रीवास द्वारा अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर कर स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी गई। अधिवक्ताओं ने यह तर्क प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता संदीप श्रीवास की पत्नी श्रीमती ज्योति श्रीवास को वर्ष 2020 में उनके ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग हो गई थी एवं वर्ष 2020 से लगातार उनकी पत्नी का बिलासपुर शहर में इलाज चल रहा है। पत्नी की बीमारी के आधार पर माह मार्च 2022 में याचिकाकर्ता का स्थानांतरण जिला कबीरधाम से जिला बिलासपुर हुआ था परंतु मात्र सात माह के भीतर याचिकाकर्ता का पुन: जीपीएम जिले में स्थानांतरण कर दिया गया। याचिकाकर्ता के मामले में छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वर्ष 2022 में जारी स्थानांतरण नीति के पैरा-1.5 को घोर उल्लंघन किया गया है जिसमें यह प्रावधान है कि 15 अगस्त 2021 के पश्चात यदि किसी शासकीय कर्मचारी की पदस्थापना किसी स्थान पर की गई है तो उसका पुन: ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात रिट याचिका को स्वीकार कर रजिस्ट्रार जनरल हाईकोर्ट एवं जिला न्यायाधीश बिलासपुर को यह निर्देश दिया गया कि वे याचिकाकर्ता की पत्नी की गंभीर बीमारी एवं स्थानांतरण नीति के पैरा-1.5 के तहत याचिकाकर्ता के स्थानांतरण मामले का नियमानुसार निराकरण करें।

