25 हजार मनोकामना ज्योतिकलश से जगमग हुआ महामाया का दरबार
नवरात्रि के पहले दिन से ही लगा भक्तों का रेला


बिलासपुर (जीआर)। शारदीय नवरात्र आज से प्रारंभ हो गया है। बिलासपुर से 30 किलोमीटर दूर रतनपुर में मां महामाया का मंदिर है । इस बार मंदिर में 25 हजार ज्योतिकलश प्रज्जवलित किये जा रहे है। कोविड महामारी के बाद परिस्थितियां सामान्य होने के बाद इस साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है। यही कारण है कि कालरात्रि पर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों के लिए 50 बसों की व्यवस्था की गई है. देश के 51 शक्तिपीठों में से एक रतनपुर। शक्ति पीठ रतनपुर महामाया में नवरात्र में दूर-दूर से आने वाले भक्तों का रेला लग रहा है। रतनपुर का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है। माना जाता है कि सभी युगों में यह नगरी विद्यमान रही है। रतनपुर राजा मोरध्वज की राजधानी भी रही है. रतनपुर में मां सति का दाहिना स्कंध( कंधा) गिरा था, जिसके कारण देश के अन्य शक्तिपीठों में महामाया भी शामिल है.रतनपुर की मां महामाया को कुंवारी शक्तिपीठ भी कहा जाता है.
आदिशक्ति मां महामाया मंदिर रतनपुर सहित शहर के सभी देवी मंदिरों में सूर्योदय के साथ पूजा-अर्चना प्रारंभ होगी। प्रथम दिवस सोमवार प्रतिपदा के साथ शैलपुत्री स्वरूप की पूजा हुई। जिसके बाद क्रमवार दूसरे दिन ब्रम्हाचारिणी फिर चंद्रघंटा, कूष्णांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं नवमीं के दिन सिद्धदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना होगी। भक्त नौ दिनों तक कठोर व्रत भी रखेंगे। शहर में नवरात्र के साथ दुर्गा उत्सव भी प्रारंभ होता है। इसके कारण षष्ठी तिथि से शहर में रौनक और बढ़ जाती है।विजयादशमी तक यह उत्सव जारी रहेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज तिवारी के मुताबिक नवरात्र प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की सुबह 3.33 बजे से प्रारंभ होगी, जो 27 सितंबर की सुबह 3.23 बजे खत्म होगी। कलश स्थापना प्रथम दिवस सुबह छह बजकर 11 मिनट से सुबह सात बजकर 51 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर छह मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक घटस्थापना का समय काल होगा।
बरगद को रक्षा सूत्र बांध मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद
मंदिर के पृष्ठ भाग में प्राचीन बरगद का पेड़ है जिस पर रक्षासूत्र बांधकर मन्नत मांगी जाती है और माना जाता है कि जिनकी मनोकामना श्रद्धापूर्वक हो उसकी इच्छा मां जरुर पूरा करते हैं। चारों युग में आधात्मिक नगरी के रुप में प्रसिद्ध रतनपुर महामाया में श्रद्धालूओं की भीड़ हमेशा रहती है। लोग दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में आते हैं और दर्शन कर अपनी मनोकामना पूरी करते हैं। कहते हैं कि महामाया मंदिर के पास वट वृक्ष है जिसमें मन्नत के साथ धागा बांधने पर वह मनोकामना जरुर पूर्ण होता है। रतनपुर महामाया मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि मां महामाया के दर्शन के पश्यात् भैरवनाथ के दर्शन आवश्यक होता है, क्योंकि भैरव महादेव का ही रुप है ऐसे में माता व पिता दोनों का ही आशीर्वाद आवश्यक होता है तभी श्रद्धालूओं की इच्छा सफल होती है। मां महामाया मंदिर से दो किलोमीटर दूर भैरव बाबा का मंदिर है और लोग यहा भी दर्शन के लिए पहुचते है जिससे यहा भी भक्ति का माहौल रहता है।
बगलामुखी मंदिर में विशेष पूजन

बिलासपुर सरकंडा स्थित श्री पीताम्बरा पीठ मांँ बगलामुखी देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र पर्व की तैयारियां जोरों शोरों से की गई है।नवरात्र पर्व मांँ भगवती बगलामुखी की भक्ति एवं श्रद्धा विश्वास पूर्वक आराधना के साथ मनाया जा रहा है। 26 सितम्बर से 4 अक्टूबर तक मंदिर में श्री मनोकामना घृत ज्योति कलश 108 की स्थापना एवं ज्वारोपण अभिजीत मुहूर्त में किया जाएगा। श्री पीताम्बरा बगलामुखी देवी जपात्मक यज्ञ, सहस्त्रनाम पाठ,श्री दुर्गा सप्तशती पाठ ,श्री सूक्त षोडश मंत्र द्वारा अभिषेक आदि कार्यक्रम नवरात्र पर्व पर वैदिक ब्रह्मणों के द्वारा निरंतर चलता रहेगा, मंदिर के आचार्य श्री दिनेश चंद्र जी ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन माँ ब्रम्हशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन श्रृंगार माँ के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री के रूप में किया गया। माँ शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। माता शैलपुत्री का जन्म शैल या पत्थर से हुआ, इसलिए इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है। मां को वृषारूढ़ा, उमा नाम से भी जाना जाता है। उपनिषदों में मां को हेमवती भी कहा गया है। भगवती पीतांबरा शत्रु नाशक श्री बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या है, यह माँ बगलामुखी की स्तंभय शक्ति की अधिष्ठात्री है इन्हीं में संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का समावेश है माता बगलामुखी की उपासना से शत्रुनाश, वाकसिद्धि ,वाद विवाद में विजय प्राप्त होती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त सभी प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है, बगलामुखी देवी के मंत्रों से दु:खों का नाश होता है। यह सभी कार्य श्री पीताम्बरा पीठ के आचार्य पं. दिनेश चंद्र पांडेय के मार्गदर्शन में संपन्न होगा।

