पक्ष सुने बिना लघु की जगह दीर्घ दंड, आईजी का आदेश निरस्त

पक्ष सुने बिना लघु की जगह दीर्घ दंड, आईजी का आदेश निरस्त

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने दुर्ग आईजी लघु दंड देने की जगह दीर्घ दंड देने के आदेश को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि सब इंस्पेक्टर का पक्ष सुने बिना अपीलीय अधिकारी का इस तरह का आदेश देना न्यायासंगत नहीं है।
जिला कांकेर में पदस्थ पुलिस सब इंस्पेक्टर सौरभ उपाध्याय वर्ष 2019 में थाना चिल्फी, जिला कबीरधाम में सब इंस्पेक्टर पद पर पदस्थ थे। उक्त पदस्थापना के दौरान उनसे एक मेनपेक (वायरलेस) सेट गुम हो जाने पर एसपी कबीरधाम द्वारा लापरवाही के आरोप में सौरभ उपाध्याय को निंदा की सजा दी गई परंतु 8 माह की समयावधि के पश्चात् पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) दुर्ग द्वारा निंदा की सजा को कम पाते हुए एसपी कबीरधाम को यह निर्देशित किया गया कि वे विभागीय जांच कर सब इंस्पेक्टर को दीर्घ दण्ड से दण्डित करें।

आईजीपी दुर्ग द्वारा जारी पुनरीक्षण आदेश से क्षुब्ध होकर सब इंस्पेक्टर द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं दुर्गा मेहर के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई। अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं दुर्गा मेहर द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि छत्तीसगढ़ पुलिस रेगुलेशन के रेगुलेशन 270(4) के अनुसार यदि अपीलीय अधिकारी किसी कर्मचारी के विरूद्ध पारित लघुदण्ड से असंतुष्ट है एवं दीर्घ दण्ड देना चाहता है तो पुनरीक्षण आदेश जारी करने के पहले उक्त पुलिस कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के उपनियम 29(3) में यह प्रावधान है कि यदि अपीलीय अधिकारी यह पाता है कि अनुशासनात्मक अधिकारी द्वारा किसी पुलिस कर्मचारी को लघुदण्ड दिया गया है तो उस दण्ड को दीर्घदण्ड में परिवर्तित करने हेतु सजा पारित होने के सिर्फ 6 माह के भीतर ही पुनरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है, 6 माह पश्चात नहीं परन्तु याचिकाकर्ता के मामले में पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) दुर्ग द्वारा समयावधि बीत जाने पर आठ माह पश्चात पुनरीक्षण की शक्ति का प्रयोग किया गया। उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात याचिका को स्वीकार करते हुए आईजीपी दुर्ग द्वारा सब इंस्पेक्टर के विरूद्ध जारी पुनरीक्षण आदेश को निरस्त कर दिया गया।

MRINMOY MALLICK

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *