सरकार बनी तो अधूरे सीवरेज को पूरा कराएंगे-अमर अग्रवाल बीजेपी का सरकार बनने पर जमीनों के बंदरबांट मामले में आयोग बनाकर जांच कराएंगे
बिलासपुर । आप सभी जानते हैं 2019 में कांग्रेस की सरकार बनी। लोगों का भरोसा लूटकर झूठे वादों से सरकार से 5 साल में ही किसान हो या युवा कर्मचारी -अधिकारी, श्रमिक- व्यापारी बुजुर्ग -महिला -पुरुष, संविदा कर्मी, अनियमित कर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोईया, पंचायत सचिव,रोजगार सहायक, स्वास्थ्य कर्मी, मितानिन हो, पैरामेडिकल डॉक्टर, बेरोजगार यह तक कि सफाई कर्मचारी आदि कोई ऐसा वर्ग नहीं है जो त्रस्त ना हो। विकास के नाम पर पूर्व में जारी छोटी-बड़ी सभी परियोजनाएं वित्तीय संसाधनों एवं दोषपूर्ण निष्पादन से ठप्प पड़ी हुई है। राजधानी रायपुर हो या न्यायधानी बिलासपुर या फिर प्रदेश का कोई इलाका ,अपराध, माफिया और नशाखोरो की जकडऩ में छत्तीसगढ़ का हाल बेहाल हो गया है। उक्त बाते पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही।
उन्होने कहा कि मंत्रिमंडल के सदस्य भी अपने आप को मोहताज पाते है और किसी तरह से दिन गिन रहे है। सीएम हाउस के सुपर कैबिनेट माने जाने वाले ब्यूरोक्रेट्स सत्ता संरक्षण में भ्रष्टाचार की हदें तोड़ चुके हैं। 5 वर्षों में छत्तीसगढ़ के हालात राष्ट्रीय शर्म का विषय बन गए है। यही अधिकारी जब हमारा समय था तो अनुशासन में रहते थे नए कीर्तिमान बनते थे और यह मेडल आते थे आज भ्रष्टाचार के प्रतिमान बन रहे तो जांच के लिए ईडी आएगी,आईटी आएगी इसमें गलत क्या है, फिर दोहराता हूं राज्य की सरकार को ई डी का आभारी होना चाहिए जो गंदगी सरकार को साफ करनी है वह भी ईडी साफ कर रही है, अगर आपके इरादे साफ है आप विचलित क्यों होते हैं, हो जाने दीजिए दूध का दूध और पानी का पानी। प्रदेश की जनता जानना चाहती है क्या इसलिए छत्तीसगढ़ बना था कि गोलमाल की आजादी होगी जो रोकेगा उसके खिलाफ धरना करेंगे, जिस संविधान की आप ने शपथ ली और सीएम बने उसी संविधान के संरक्षक राज्यपाल के खिलाफ जनहितों के बजाय केवल राजनीतिक मान मर्यादा और संसदीय परंपराओं को ताक में रख देंगे।
कांग्रेस के नेता विदेश में जाते हैं और भारत विरोधी एजेंडा सीख कर आते है,आप उनसे सीखते हैं तो देश की संघीय व्यवस्था और संविधानिक पदों पर बैठे प्रधानमंत्री को निशाना बनाते है।आपकी फोटोशूट की चाह की हद कोरोना एप के टीके में दिख गई, आपकी फोटो छपवाने की जिद में कई दिनों तक सॉफ्टवेयर नहीं चला इस बीच कितनी जानें गई होंगी उसका जिम्मेदार कौन है, जरा पता कर लीजिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख बढ़ी है यह विश्व के बड़े बड़े देश मानते है। धारा 370 का मुद्दा हो, राम लला की जन्मभूमि पर विधिसम्मत मंदिर निर्माण संकल्प हो, महामारी की चुनौती से निपटने के प्रयास हो कोरोना का टीका भारत में पूरे विश्व का काम आ रहा है लेकिंन इन्हें रास नही आ रहा था। भारत की इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है,इनको रास नहींआता है, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा रहा है फॉरेन इन्वेस्टमेंट व्यापार बढ़ रहा है इनको अच्छा नहीं लग रहा है ये कहते है महंगाई बढ़ रही है अरे पूरा विश्व 3 साल से महामारी और विश्व युद्ध की कगार पर खड़ा है, पड़ोसी देशों में आटा सैकड़ों रुपए किलो है, जो सोने की लंका कहा जाता था वहां कर्ज लेकर लोग राह रहे है।
अमेरिका जैसे बड़े देशों में बड़े बैंकों के हालात आपको मालूम है, लेकिन भारत में इन्हीं परिस्थितियों में सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों का सतत संवर्धन करते हुए नवाचार और आधुनिक विकास की राह में चल रहा है, इन्हें अच्छा नहीं लग रहा है।बावजूद इसके महंगाई पर नियंत्रण के भी प्रयास जारी है, देश के नागरिकों वित्तीय जागरूकता और साक्षरता बढ़ी है।लोग अब बचत और निवेश के मायने महामारी के समय में समझने भी लगे हैं,प्रकृति के संकेतों को देशवासी महसूस लगे हैं लेकिन विरोधियों को तो केवल मोदी जी की स्वच्छता के संस्कृति में भी खलल डालना नजर आता है, हमारे प्रधानमंत्री ने कभी परवाह नहीं कि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सूत्र वाक्य लेकर
पुरुषार्थ से सरकार चला रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस की वादा निभाने की बारी आई तो आरक्षण और जनगणना को बहाना बनाकर जनता के सामने अपनी नाकामी को छुपाने का असफल कोशिश कर रहे है। वन नेशन वन राशन कार्ड लागू है 74 लाख परिवारों के राशन कार्डों का ब्यौरा खाद विभाग की वेबसाइट में है, फिर किस बात का आंकड़ा चाहिए और आपके पास आंकड़े ही नही थे… बेरोजगारी की दर राज्य में जीरो से नीचे होने झूठ क्यों फैलाया गया ?उसके बाद चपरासी की भर्ती में 3 लाख कैसे बैठे ,उसका भी परिणाम नही आया? अन्य भर्ती की सारी परीक्षाएं अटकी पड़ी है उनका भी परिणाम नहीं आ रहा है? लाखों कर्मचारियों के भत्तोंपर आप निर्णय नहीं ले पा रहे हैं, पदोन्नति का परिणाम नहीं आ रहा है? कर्मचारियों को नियमित करने के लिए आपके पास आंकड़े नहीं हैं ऐसे में आपका आर्थिक मॉडल देश में सबसे ज्यादा सशक्त कैसे हुआ है। गोबर धन योजना का पंचायत सचिवों की हड़ताल से गुड़ गोबर हो गया है सरकार को सुध नहीं है।
उन्होंने आगे कहा बिलासपुर हमारा शांत शहर माफिया राज,नशे और बढ़ते अपराध की गिरफ्त में आ चुका है। शहरवासी बढ़ती चाकूबाजी गुंडागर्दी लूट खून खराबे से निजात चाहते है, लेकिन पुलिस ही निजात अभियान की आड़ में धंधा चलाएं तो कैसे शांति आएगी? नक्कारे जनप्रतिनिधियों को अरबों रुपए की अधूरी विकास परियोजनाएं उन्हें घर के आईने में दिखाई नही पड़ती।इसीलिए जन जागरण के उद्देश्य से सोई हुई सरकार को जगाने अपने किए हुए कामों की जांच परख करने और उन्हें पूरा करने का संकल्प लेने के लिए उन्हें स्थलों पर जाकर मोर्चा लगाकर क्षेत्र के वासियों के साथ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि बिलासपुर का कायाकल्प करने वाली योजनाओं को रोकने वाला आखिर कौन है? विकास को तरसते बिलासपुर के अधूरे विकास की अधूरी कहानी को कौन पूरा करेगा…..?
हमारे दिसम्बर के अभियान के बाद तीन महीनों में प्रशासन के द्वारा नागरिकों की समस्या के लिए कोई पहल नहीं की गई तो पुन: यह 20 मार्च अभियान शुरू किया है….15 अप्रैल तक युवा मोर्चा महिला मोर्चा मंडल के विभिन्न साथियों के साथ खड़े हो जानने की कोशिश की, तो मालूम हुआ कि सरकार का एजेंडा ही विकास विरोध का है।
20 मार्च साइंस कॉलेज के 25 एकड़ के परिसर में दिल्ली के प्रगति विहार की तरह वाले परिसर की बदहाली का हाल देखने पहुंचे, करोड़ो की लागत के बाद भी कांग्रेस की सरकार के समय 10 से 15 परसेंट बचा हुआ कार्य पूरा नहीं हो सका और अब यह मैदान नशेडियो, जुआरियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बनते जा रहा है।दिल्ली के प्रगति मैदान तर्ज पर साइंस कॉलेज मैदान में मल सुविधाओं वाला केंद्र विकसित करने का कार्य 2016 से 2018 में 25 करोड़ की लागत से ज्यादा राशि के बाद भी अधिकतम दो साल में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट आज भी अधूरा पड़ा है।
22 मार्च को 2008 में लगभग 8 करोड़ की लागत से बने जिला खेल परिसर के हालात देखने गए और मोर्चे पर बैठे। बैडमिंटन,तैराकी कुश्ती, जिम, योगा टेबल टेनिस, हॉकी, क्रिकेट फुटबॉल जिन खेलों के लिए यह व्यवस्था की गई थी खेल तो नहीं हो नहीं हो रहे हैं भ्रष्टाचार का खेल हो रहा है।खेल परिसर सरकंडा की खराब स्थिति के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग इस मैदान को संवारने से लेकर सुविधा संसाधन और अधोसंरचना विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिए जाने से मैदान की दुर्दशा हो रही है।
27 मार्च को सिटी बस की बदहालीके लिए पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में मोर्चे पर बैठे…..छोटे शहर की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरे प्रदेश में जो 183 करोड़ की लागत से 471 सिटी बसें महानगरों की तर्ज पर हम ने चलवाई। बिलासपुर में 50 बसें आरम्भ हुई। चारों दिशाओं में बिलासपुर से जाने वाले हजारों नागरिकों को प्रतिदिन सस्ती और सर्व सुविधा युक्त आधुनिक परिवहन की सुविधा मिली।महामारी के समय लाक डाउन के बाद से सिटी बस की सुविधा बदहाली के दौर से गुजर रही है। नोडल एजेंसी लापरवाही से करोड़ों रुपए की बसे कबाड़ में तब्दील हो गई है, 3 करोड़ रुपए मरम्मत का देने के लिए भी इस सरकार के पास नहीं है, हमने पहले भी हल्ला बोला किसी तरह से कुछ बसे शुरू की गई, प्रशासनिक अनदेखी की भेट बिलासपुर की सिटी बस योजना दम तोड़ रही है इसकी सुध लेने वाला कोई नही है।

