रेलवे स्कूल में फीस 2 गुना बढ़ी,अभिभावकों ने डीआरएम कार्यालय का किया घेराव

रेलवे स्कूल में फीस 2 गुना बढ़ी,अभिभावकों ने डीआरएम कार्यालय का किया घेराव

बिलासपुर। रेलवे स्कूल की फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी के खिलाफ लामबंद अभिभावकों ने सीनियर डीपीओ का घेराव कर दिया। रेलवे कर्मचारियों के अलावा गैर रेलवे कर्मचारियों के बच्चों को भी इन स्कूलों में प्रवेश दिया जाने लगा। रेलवे स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों की अपेक्षा फीस स्ट्रक्चर काफी कम हुआ करता था, लेकिन इसमें अचानक बेतहाशा बढ़ोतरी से अभिभावक परेशान है।
वर्ष 2023- 24 के सत्र के लिए फीस में बढ़ोतरी की गई है। अब रेलवे के स्कूलों में रेल कर्मचारियों के अलावा गैर रेल कर्मचारियों के बच्चे भी पढ़ाई करते हैं जिनके लिए अलग-अलग फीस स्ट्रक्चर की व्यवस्था है। नए सत्र में कक्षा 2 से लेकर 5 तक के लिए रेल कर्मचारियों के बच्चों से 14000 और गैर रेल कर्मचारियों के बच्चों से 19000 फीस निर्धारित की गई है। बताया जा रहा है कि पहले यह फीस 29000 हुआ करती थी, जिसे यकायक बढ़ाकर 19,000 कर दिया गया है। जानकारी मिली है कि पहले रेल कर्मचारियों के बच्चों से प्राथमिक स्तर के लिए सालाना 9000 और गैर रेल कर्मचारियों के बच्चों से सालाना 12000 की फीस ली जाती थी। यह फीस रेलवे के स्कूल नंबर वन की है। वही स्कूल नंबर 2 में रेल कर्मचारियों के बच्चों से 27400 और गैर रेल कर्मचारियों के बच्चों से 9400 की फीस ली जा रही थी।
इसके अलावा हाई स्कूल के लिए रेलवे कर्मचारियों के बच्चों से 14,500 और गैर रेलवे कर्मचारियों के बच्चों से 17,500 की फीस ली जा रही थी। दो नम्बर स्कूल में रेल कर्मचारियों के बच्चों से 10,300 और गैर रेल कर्मचारियों के बच्चों से 12,300 की फीस ली जा रही थी। इसके अलावा 1000 से लेकर 2500
एडमिशन फीस भी शामिल थी। इस भारी-भरकम फीस स्ट्रक्चर के बावजूद इस वर्ष यकायक स्कूल फीस में भारी बढ़ोतरी से अभिभावक नाराज हो गए, जिन्होंने सीनियर डीपीओ के कार्यालय का घेराव कर दिया। जब वह अपने दफ्तर में नहीं मिले तो अभिभावक डीआरएम के पास शिकायत लेकर पहुंच गए, जिन से मिले आश्वासन के बाद सीनियर डीपीओ ने एक बार फिर बैठक करने की बात कही है। अभिभावकों का कहना है कि फीस में इतनी भारी बढ़ोतरी करने की बजाय मामूली बढ़ोतरी उन्हें स्वीकार्य है। अगर रेलवे अधिकारी इस विषय में उदारता पूर्वक विचार नहीं करते हैं तो फिर जनप्रतिनिधियों की मदद से इसे आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा।

MRINMOY MALLICK

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