राम विरोधी का नहीं देता कोई साथ
श्री राम का राज्याभिषेक
श्रीराम कथा का अंतिम दिन
बिलासपुर। श्रीराम कथा के अंतिम दिन लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में संत विजय कौशल महाराज ने प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक प्रसंग में बताया रावणी संस्कृति के विनाश के बाद चारो ओर आनंद छाया हुआ है।
धूलधूसरित रावण की लाश रणभूमि में पड़ी हुई और पूरी लंका में शोक छा गया। मंदोदरी ने युद्ध के मैदान में घोर रुदन कर विलाप करती है कि कोई देवी देवता आप के आगे नहीं लगते लेकिन राम विरोधी का कोई साथ नहीं देता।
प्रभु श्री राम नैतिक धर्म का पालन करते हुए राजकीय सम्मान के साथ मायावी रावण के संस्कार का निर्देश देते हुए महाराज विभीषण को उनका राज सौंपते है।

माता जानकी के साथ रामेश्वरम में भगवान शिव का पूजन कर प्रयागराज होते हुए अयोध्या की ओर वापस लौटते है। अवधपुरी बहुत ही सुंदर सजाई गई थी। ब्रह्माजी,शिवजी और मुनियों की समूह प्रभु के दर्शन को आए थे, आकाश से देवतागण पुष्प वर्षा कर रहे थे। श्री रघुनाथजी ने तीनों भाइयों के साथ गुरुजनों माताओं का आशीर्वाद लेते है।मुनि वशिष्ठ जी द्वारा मंगाए गए दिव्य सिंहासन पर श्री रामचन्द्रजी विराजमान हो जाते है। कुलगुरु मुनि वशिष्ठ जी भगवान श्री राम के माथे पर तिलक लगा कर उनका राज्याभिषेक करते है।
अमर अग्रवाल ने शहर वासियों का धन्यवाद ज्ञापित किया

