आरक्षक को आउट आफ टर्न प्रमोशन देने हाईकोर्ट का निर्देश

बिलासपुर। नक्सल आपरेशन में शामिल दल के बाकी सदस्यों की तरह आउट आफ टर्न प्रमोशन न मिलनेे पर एक आरक्षक द्वारा दायर की गई याचिका पर हाईकोर्ट ने डीजीपी को उसके अभ्यावेदन का नियमानुसार निराकरण करने का निर्देष दिया है।
ग्राम मटलूटोली, तहसील एवं थाना कुनकुरी, जिला जशपुर निवासी ललित मिंज वर्ष 2019 में स्पेशल टास्क फोर्स बघेरा, जिला-दुर्ग में पुलिस कांस्टेबल के पद पर पदस्थ था। उक्त पदस्थापना के दौरान ललित मिंज एवं उनके साथियों को ग्राम तिरिया के जंगल नाला के पास पुलिस थाना नगरनार (बस्तर) में नक्सलाईड ऑपरेशन हेतु भेजा गया। उक्त एंटी नक्सल ऑपरेशन में ललित मिंजउ एवं उनके साथियों द्वारा मुठभेड़ के पश्चात कुछ नक्सली मारे गये एवं भारी मात्रा में हथियार एवं अन्य विस्फोटक पदार्थ जब्त किये गये। दिनांक 27.03.2020 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा उक्त नक्साईड ऑपरेशन में शामिल प्लाटून कमांडर एवं अन्य कांस्टेबल को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन प्रदान किया गया परंतु याचिकाकर्ता को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन प्रदान नहीं किया गया। आरक्षक ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की। अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि किसी पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी द्वारा सेवाकाल के दौरान अदम्य साहस एवं वीरता का परिचय देने पर पुलिस रेगुलेशन 1861 के नियम 70-ए के तहत् आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिये जाने का प्रावधान है। चूंकि वर्ष 2019 में पुलिस थाना नगरनार, जिला बस्तर में हुए एंटी नक्सल आपरेशन में याचिकाकर्ता अन्य पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ उक्त ऑपरेशन में शामिल हुआ था परंतु अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रमोशन देकर याचिकाकर्ता को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन से वंचित किया जाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार का घोर उल्लंघन है। उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), रायपुर को यह निर्देशित किया गया कि वे याचिकाकर्ता का पुलिस कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल के पद पर आउट आफ टर्न प्रमोशन हेतु प्रस्तुत अभ्यावेदन का नियमानुसार निराकरण कर याचिकाकर्ता को हेड कान्स्टेबल के पद पर आउट ऑफ टन प्रमोशन प्रदान करें।

